पीएम मोदी के कहे अनुसार उन्होंने वूमेंस डे के मौके पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट को 7 महिलाओं को समर्पित किया. इन महिलाओं में कोई लोगों को खाना खिलाता है, कोई किसान है तो कोई जल संरक्षण के प्रति जागरूक है. आइए जानते हैं इन महिलाओं की कहानी उन्हीं की जुबानी जो उन्होंने पीएम मोदी के सोशल मीडिया पर शेयर किया.

कल्पना रमेश:- जल संरक्षण की योद्धा कल्पना रमेश कहती है कि योद्धा बनिए लेकिन थोड़े हटके. आपके छोटे कदम बड़ा प्रभाव डाल सकते है. जल का जिम्मेदारीपूर्वक खर्च करें, वर्षा जल का संरक्षण करें, पानी को बचाकर जागरूकता फेलाइए.

मालविका अय्यर:- 13 साल की उम्र में ही मालविका बम धमाके की शिकार बनी थी. उस धमाके से उनके हाथ चले गए लेकिन उसका हौसला नहीं. बता दें कि मालविका एक प्रेरक वक्ता, दिव्यांक कार्यकर्ता और एक मॉडल भी है. मालविका ने पीएम मोदी के सोशल मीडिया पर लिखा, छोड़ देना कोई विकल्प नहीं होता अपनी मेहनत, लगन और उम्मीद के साथ दुनिया का सामना कीजिए.

स्नेहा मोहनदास:- स्नेहा अपनी मां से प्रेरित होकर फूड बैंक इंडिया के नाम से पहल शुरू की. स्नेहा फूड बैंक इंडिया के तहत भूखे लोगों को खाना खिलाने का काम करती है. स्नेहा ने मोदी के सोशल अकाउंट में लिखा, हमने अपने काम से लोगों पर असर डाला है हमारी 20 से ज्यादा शाखाएं भारत में मौजूद है. हमने सामूहिक तौर पर खाना पकाना, खाना खिलाना तथा स्तनपान जागरूकता जैसे अभियान भी चलाए हैं.

विजया पवार:- महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाली विजया पवार अपनी बंजारा हस्तकला को बढ़ावा दे रही है. विजया पवार ने मोदी के ट्विटर में ट्वीट कर लिखा, मैं पिछले दो दशक से यह काम कर रही हूं और इसमें हजारों महिलाएं मेरा साथ दे रही है.

अरीफा जान:- आरिफा कश्मीर की रहने वाली है और कश्मीर की परंपरा को फिर से जीवित करने का सपना देख रही है. पीएम मोदी के सोशल मीडिया अकाउंट पर ट्वीट कर आरिफा ने कहा, मैं महिला कलाकारों की स्थिति देखती थी और मेरी यह प्रयास है कि मैंने फिर से नमदा कला को जिंदा करने का प्रयास किया. क्योंकि जब आधुनिकता और परंपरा का मिलान होता है तो चमत्कार हो सकता है. तो मैंने अपनी परंपरा को देखते हुए आधुनिक बाजार के अनुसार डिजाइन किया है.

वीना देवी:- कहते हैं जहां चाह वहीं राह होती है वीना भी उसी का एक उदाहरण है. वीना मशरूम की खेती करती है लेकिन शुरुआत में उनके पास इतनी जगह नहीं थी कि वह मशरूम की खेती कर सकती थी. लेकिन उन्होंने अपने इच्छा को जगह के आड़े नहीं आने दिया. वीना कहती है, अपनी इच्छा शक्ति से सब कुछ हासिल किया जा सकता है मैंने यह इच्छाशक्ति अपने पलंग के नीचे 1 किलो मशरूम उगा कर किया था. मुझे अपनी विश्वास और आत्मनिर्भरता ने मुझे एक नई पहचान दी है.

कलावती देवी:- उत्तर प्रदेश के कानपुर की रहने वाली कलावती देवी एक राजमिस्त्री का काम करती है इतना ही नहीं वह शौचालय निर्माण के लिए धन इकट्ठा करती है. कलावती देवी कहती है मैं जहां रहता था उसके आसपास काफी गंदगी हुआ करता था लेकिन मन में एक विश्वास था की स्वच्छता के जरिए इस गंदगी को हटाया जा सकता है तो मैंने लोगों को जागरूक किया और शौचालय निर्माण के लिए धन इकट्ठा करना शुरू किया.

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